भारतीय रेलवे ने ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है — पिछले 6 महीनों (जुलाई-दिसंबर 2025) में कुल 1,698 पत्थरबाजी के मामले दर्ज किए गए हैं और 665 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। �
🚆 क्या हुआ?
भारतीय रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच 1,698 पत्थरबाजी के मामले दर्ज हुए, जिसमें 665 लोगों को गिरफ्तार किया गया। �
रेलवे ने इसे एक गंभीर आपराधिक कृत्य बताया है जो न केवल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है बल्कि सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाता है। �
📊 ज़ोन-वार स्थिति
कई रेलवे जोनों में यह समस्या सामने आई है, जिनमें से कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
उत्तर रेलवे – 363 मामले
पूर्व मध्य रेलवे – 219
दक्षिण मध्य रेलवे – 140
उत्तर मध्य रेलवे – 126
पश्चिमी रेलवे – 116
दक्षिणी रेलवे – 108
(अन्य जोनों में भी दर्ज हैं कई मामले) �
👮 रेलवे की कार्रवाई
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है, जिससे पत्थरबाजों की पहचान और गिरफ्तारियाँ तेज हुई हैं। �
रेलवे ने यह स्पष्ट किया है कि जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। �
⚠️ क्यों यह गंभीर है?
ट्रेनों पर पत्थर बरसाने से:
यात्रियों और स्टाफ की जीवन-सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है
कोचों के शीशे टूटने और ट्रेन को नुकसान पहुँचने की घटनाएँ सामने आती हैं
कुछ प्रीमियम ट्रेनों, जैसे वंदे भारत एक्सप्रेस, को भी नुकसान हुआ है। �