UGC ने 13 जनवरी 2026 को “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” लागू किया है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकना है.
नियम के तहत हर संस्थान में Equal Opportunity Centre, Equity Committee, Equity Squad और 24×7 हेल्पलाइन जैसी निगरानी संस्थाएँ बनानी होंगी और शिकायतों का पालन समयबद्ध करना होगा. �
📉 क्यों बवाल मचा?
मुख्य वजहें (controversy hotspots):
🔥 1) सामूहिक विरोध – छात्रों, अभिभावकों और संगठनों द्वारा
General category (सामान्य वर्ग) छात्र और कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि नियम उनके खिलाफ एकतरफा है और बिना सबूत शिकायतों को आगे बढ़ा देगा. �
सोशल मीडिया पर #UGCRollback जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. �
🧑⚖️ 2) सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नियम के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण बताया गया है, जिससे न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. �
🏛️ 3) प्रशासनिक विरोध और इस्तीफे
बरेली के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने नियम को “काला कानून” बताते हुए इस्तीफा दे दिया. �
The Times of India +1
कुछ धार्मिक और सामाजिक समूहों के सम्मेलन में भी विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुईं. �
🗣️ 4) सवर्णों vs OBC/SC/ST बहस
विवाद इस बात तक पहुंच गया है कि जनरल बनाम OBC/SC/ST के अलग-अलग दृष्टिकोण उभर रहे हैं—कुछ लोग इसे “उल्टा भेदभाव” मान रहे हैं. �
🏛️ 5) राजनीतिक असंतोष
कुछ नेताओं और संगठनों ने नियम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें समर्थन भी और आलोचना भी शामिल है. �
📌 UGC और समर्थकों का पक्ष
UGC का कहना है कि पिछले सालों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, इसीलिए सख्त नियम लाए गए हैं ताकि समान अवसर और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सके. �
📊 सार में
पहलु
विवाद का मुख्य कारण
Equity नियम
सामाजिक न्याय के लिए, भेदभाव रोकना
विरोध
इसे एकतरफा, भेदभावपूर्ण, और दुरुपयोग संभावित बताया जा रहा है
सुप्रीम कोर्ट
नियम को चुनौती दी गई
प्रशासनिक असर
PCS अधिकारी का इस्तीफा, मंच हंगामा
राजनीतिक प्रतिक्रिया
समर्थन और आलोचना दोनों
UGC के नए नियम पर बवाल
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