अमेरिका भारत को लौटाएगा 3 प्राचीन मूर्तियां — “शिव नटराज” सबसे खास
अमेरिका के स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने एक बड़ा निर्णय लिया है — वह भारत को तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियां लौटाएगा, जो दशकों पहले तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई थीं। �
🗿 कौन-सी मूर्तियां वापस की जाएंगी?
इन तीन प्रतिष्ठित मूर्तियों को भारत को लौटाया जाएगा: �
- शिव नटराज – चोल काल (लगभग 10वीं सदी) की प्रतिष्ठित मूर्ति, भगवान शिव का ‘नटराज’ रूप। �
- सोमस्कंद – 12वीं सदी का चोल कालीन कांस्य. �
- संत सुंदरर विद परावई – विजयनगर काल (16वीं सदी) की मूर्ति.
ये मूर्तियां मूल रूप से तमिलनाडु के मंदिरों में पूजा और जुलूसों में रखी जाती थीं और दक्षिण भारतीय कांस्य कला की उत्कृष्ट मिसाल हैं। �
📜 क्यों वापस कर रहा है अमेरिका?
म्यूजियम ने एक गहन जांच (provenance research) की, जिसमें पता चला कि ये मूर्तियां 1950 के दशक में तमिलनाडु के मंदिरों में थीं, लेकिन बाद में गलत दस्तावेज और अवैध तरीके से अमेरिका पहुंचीं। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी पुष्टि की कि इन मूर्तियों का भारत से हटना भारतीय कानून का उल्लंघन था। �
The Indian Express
🤝 भारत-अमेरिका सहयोग
भारत सरकार और अमेरिकी म्यूजियम के बीच डिप्लोमैटिक और प्रशासनिक समझौता हुआ है। �
शिव नटराज को लौटा कर, भारत उसे दीर्घकालिक लोन (long-term loan) पर वापस म्यूजियम में प्रदर्शित भी कर सकता है ताकि उसकी पूरी कहानी — मूल, चोरी, और वापसी लोगों के सामने आए। �
🌍 यह क्यों मायने रखता है?
यह निर्णय भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और पुनर्स्थापना में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, और यह दिखाता है कि कैसे देशों के बीच सहयोग से इतिहासिक कलाकृतियों को उनके मूल स्थान पर वापस लाया जा सकता है। �