इज़रायल और हमास के बीच करीब दो साल से चल रहे युद्ध के कारण गाज़ा पट्टी में फैल रही भुखमरी ने मानवता का संकट पैदा कर दिया है।

पहली तस्वीर में नाइमा अबू फुल अपने दो साल के बच्चे याज़ान को लेकर एक रेफ्यूजी कैंप में बैठी हुई हैं। सही पोषण ना मिलने के कारण बच्चें की हड्डियां दिखने लगी हैं।

पिछले तीन-चार दिनों में फिलिस्तीनी क्षेत्र में कुपोषण और भुखमरी के कारण करीब 21 बच्चों की मौत हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने बुधवार को बताया कि गाजा को ‘मानव-निर्मित’ भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। गाजा सिटी में भूख संकट के बीच, फिलीस्तीनी लोग एक चैरिटी रसोई से भोजन प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

युद्ध के कारण गाज़ा में फैल रही भुखमरी के चलते इज़रायल समेत मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में प्रदर्शन भी हो रहे हैं। तीसरी, चौथी और पांचवी तस्वीर इज़रायल के तेल अवीव शहर में प्रदर्शन की हैं जहां लोग फिलिस्तीनियों के विस्थापन और खाने के वितरण को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

आखिरी तस्वीरें लेबनान के बेरुत में स्थित मिस्र के दूतावास के बाहर की हैं जहां लोग इज़रायल-हमास युद्ध और गाज़ा में फैल रही भुखमरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

  1. खाद्य आपूर्ति में भारी कमी

गाज़ा पट्टी पर लगे प्रतिबंधों और निरंतर बमबारी के कारण खाद्य सामग्री और जीवन-जरूरी सामान की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। जो थोड़ी-बहुत मदद पहुँच भी रही है, वह ज़रूरतों के मुकाबले बहुत कम है।

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  1. बच्चों की स्थिति बेहद चिंताजनक

यूनिसेफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, गाज़ा में हजारों बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में तो गंभीर कुपोषण की वजह से बच्चों की जान पर बन आई है।

  1. स्वास्थ्य सेवाएँ ध्वस्त

स्वास्थ्य सेवाएं नष्ट हो चुकी हैं। अस्पतालों में दवाइयों, ईंधन, और स्टाफ की भारी कमी है, जिससे न केवल युद्ध के घायलों का इलाज मुश्किल हो रहा है, बल्कि आम बीमारियों से भी लोग मर रहे हैं।

  1. मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मानवीय राहत नहीं पहुंचाई गई तो यह “मानव निर्मित अकाल” की स्थिति बन सकती है।


समाधान और अपील:

स्थायी युद्धविराम की ज़रूरत है ताकि राहत सामग्री बिना बाधा पहुंच सके।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजनयिक दबाव डालकर सभी पक्षों को वार्ता की मेज़ पर लाना चाहिए।

नागरिकों की रक्षा के लिए विशेष मानवीय गलियारे बनाए जाने चाहिए।

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