पटना में सोमवार को हुई बारिश ने जल निकासी की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, बिहार की राजधानी में बारिश के बाद हुए जलभराव के चलते लोगों को अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिये मजबूर होना पड़ा।


🌧️ बारिश और जलभराव की स्थिति

रात भर की तेज बारिश के बाद पटना की लगभग 150 से अधिक कॉलोनियों और मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिसमें कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, पटना जंक्शन, डाक बंगला चौराहा, GPO गोलंबर जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं ।

पटना जंक्शन और राजेंद्र नगर रेलवे टर्मिनल में पानी भरने से कम से कम 25 ट्रेनें प्रभावित हुईं। ट्रैक पानी में डूब गए, सिग्नल सिस्टम फेल हो गया और यात्री सामान सहित पैदल चलते देखे गए, जबकि पंपिंग वर्कर्स ने पानी निकालने में जुटे रहे ।

डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा का सरकारी आवास और विधानसभा परिसर जलमग्न हो गया, जिससे प्रशासन की तैयारी पर सवाल उठे ।


🧑‍🤝‍🧑 लोगों की स्थिति

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गली-नक्शे जलमग्न होने से लोग अपने घर-परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो गए। कईयों ने अपने सामान को लेकर वीइजी स्थानों की ओर मूव किया।

कार्यालय जाने-जाने में दिक्कत, स्कूल वैनें फंसी रहीं, वृद्ध व बच्चे खासे प्रभावित हुए ।


⚠️ ड्रेनेज सिस्टम में कमी

शहर के ड्रेनेज नेटवर्क की सफाई और रख-रखाव का दावा असत्य साबित हुआ। कई जगहें नालियाँ पूरी तरह अवरुद्ध थीं, कई वर्षों पुरानी ड्रेनेज योजनाएं अधूरी पड़ी रहीं ।

नगर निगम अक्सर प्राथमिकता देने का दावा करता रहा, लेकिन बारिश के तुरंत बाद ही सब कुछ फेल हो गया ।


📋 सारांश

विषय विवरण

बारिश का समय रविवार देर रात से लेकर सोमवार सुबह तक लगातार तेज वर्षा
प्रभावित इलाके पटना जंक्शन, कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, सरकारी परिसरों आदि
मुख्य समस्या जलनिकासी बंद, ड्रेनेज फेल, पंपिंग यंत्रों की कमी
प्रशासनिक कमजोरी जिलेवार तैयारियों का अभाव और नागरिक असंतोष
रेल और सार्वजनिक यातायात प्रभाव ट्रेन देरी, स्टेशन पर पानी भरना, यात्रियों की परेशानी


📝 निष्कर्ष

इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि पटना नगर निगम की नीतियां और मानसून-पूर्व तैयारियां धीमी गति से हैं और पर्याप्‍त प्रभावी नहीं हैं। बस कुछ घंटों की तेज बारिश में सबकुछ चरमरा गया — जिससे नागरिकों को सीख मिलती है कि केवल दावे से काम नहीं चल सकता, ज़मीनी योजना और समय पर क्रियान्वयन ज़रूरी है।

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