🕰️ अप्रत्याशित मुलाक़ात और आधे घंटे का इंतज़ार
सोमवार रात करीब 9 बजे, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बिना पूर्व सूचना दिए राष्ट्रपति भवन पहुंचना का निर्णय लिया और लगभग 25–30 मिनट तक इंतज़ार करने के बाद (9:00 बजे से 9:25 बजे तक) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाक़ात कर अपना त्यागपत्र सौंपा। इसके बाद उन्होंने आधा घंटा बाद ट्विटर (अब X) पर यह जानकारी सार्वजनिक की ।
🧑⚖️ आधिकारिक कारण: स्वास्थ्य
त्यागपत्र में धनखड़ ने स्पष्ट रूप से लिखा कि वे स्वास्थ्य संबंधी सलाह को प्राथमिकता देना चाहते हैं और इसका पालन करते हुए तत्काल प्रभाव से अपना पद छोड़ रहे हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत संभव है ।
🧩 पाठ्यक्रम के बीच अचानक त्याग?
यह कदम मॉनसून सत्र के पहले दिन आया, जब सांसद कार्यवाही में लगे हुए थे ।
राजनीतिक हलकों में बताया गया कि धनखड़ का व्यवहार सरकार के साथ मतभेद का संकेत था—उदाहरण स्वरूप, उन्होंने न्यायाधीश यशवंत वर्मा के संवैधानिक विवाद में गंभीर कदम उठाए, जो सरकार को मंजूर नहीं था ।
इसके अलावा, कांग्रेस की राय है कि केंद्रीय मंत्री उस बैठक में शामिल नहीं हुए जिसमें धनखड़ अध्यक्ष थे, और यह घटनाक्रम “गहरे कारणों” की ओर संकेत करता है ।
⚠️ राजनीतिक प्रतिक्रिया व आरोप
कांग्रेस: यह अचानक त्याग सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं, बल्कि गहराई में जानकारियाँ हैं; आखिरकार मंत्री बैठक में शामिल नहीं हुए थे—यह “मजाक नहीं” थी ।
पी. चिदंबरम: तर्क दिया कि धनखड़ ने “संवैधानिक सीमा” पार की, जिससे सरकार का विश्वास टूट गया ।
आशोक गहलोत: कहा कि धनखड़ पर दबाव था, और स्वास्थ्य कारण सिर्फ बहाना हो सकता है 。
TMC: आरोप लगाया कि NDA सरकार ने उन्हें “इंपीचमेंट की धमकी” दी—इस कारण उन्होंने इस्तीफा दिया ।
📜 संवैधानिक प्रक्रिया आगे क्या?
राष्ट्रपति ने त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है और चुनाव आयोग ने नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है (अगले सप्ताह की शुरुआत में) ।
तब तक, हरिवंश (Rajya Sabha के डिप्टी चेयरमैन) सदन की कार्यवाही देखेंगे ।
✅ संक्षेप में:
धनखड़ की अचानक रात की द्रौपदी भवन विज़िट और आधा घंटा इंतज़ार एक असामान्य घटना थी।
वे स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा मान रहे हैं, लेकिन विपक्ष और कुछ वरिष्ठ नेता इसे राजनीतिक विवाद मान रहे हैं।
प्रक्रिया जारी है—नई नियुक्ति जल्द होने की संभावना है।