भगवान के दरबार में कोई ‘VIP’ नहीं सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

🧑‍⚖️ क्या हुआ है? Supreme Court-सुनवाई का मुख्य बिन्दु
🔹 सुप्रीम कोर्ट में उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह (Inner Sanctum) में VIP प्रवेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई हुई।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “महाकाल के सामने कोई VIP नहीं होता” और इस तरह के वीआईपी दर्शन-प्रवेश को लेकर अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाया। �

🔹 अदालत ने कहा कि भगवान के सामने सभी भक्त समान हैं, और किसी को विशेष दर्जा देने का निर्णय अदालत नहीं दे सकती। यह निर्णय मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रबंधन के विवेक पर छोड़ना बेहतर है। �

🔹 सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि फिलहाल कोई रोक या आदेश नहीं दिया है, पर वीआईपी दर्शन पर कोई विशेष अधिकार नहीं जैसा-कुछ मानने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने कहा कि यह वही स्थान है जहाँ सब भक्त बराबर हैं — चाहे वह उच्च अधिकारी हों या आम श्रद्धालु। �

📌 क्या अदालत ने आदेश दिया?
❗ अभी कोई स्थायी आदेश या रोक नहीं दी गई है, पर कोर्ट ने रुख स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थल या भगवान के सामने “VIP” जैसा विभाजन स्वीकार्य नहीं है. �

📍 इसका मतलब क्या है?
✔️ मंदिर-धार्मिक स्थल में दर्शन-प्रवेश के मामले पर समानता का संदेश दिया गया।
✔️ अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति— VIP हो या आम भक्त — भगवान के दर्शन में अलग स्थान नहीं पा सकता।
✔️ इस विषय पर मंदिर प्रशासन को निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई। �

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